बाल विकास की अवधारणा (Concept of Child Development)

 बाल विकास की अवधारणा (Concept of Child Development)
बाल विकास से आशय बच्चे में होने वाले शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक परिवर्तनों से है, जो गर्भावस्था से किशोरावस्था/प्रौढ़ावस्था तक निरंतर होते रहते हैं। यह परिवर्तन क्रमबद्ध, सतत और विकास के निश्चित नियमों पर आधारित होते हैं।


 

CDP (Child Development & Pedagogy) में यह एक मूल अवधारणा है।
1️⃣ बाल विकास की प्रमुख विशेषताएँ
विकास जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है
विकास एक सतत (Continuous) प्रक्रिया है
विकास में व्यक्तिगत अंतर पाए जाते हैं
विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है
विकास सीखने और परिपक्वता दोनों पर निर्भर करता है
2️⃣ बाल विकास के क्षेत्र (Domains of Development)
(i) शारीरिक विकास (Physical Development)
ऊँचाई, वजन, मांसपेशियों का विकास
इंद्रियों (आँख, कान आदि) का विकास
स्थूल व सूक्ष्म पेशीय कौशल (चलना, लिखना)
(ii) मानसिक/बौद्धिक विकास (Cognitive Development)
सोचने, समझने, तर्क करने की क्षमता
स्मृति, ध्यान, कल्पना का विकास
पियाजे के अनुसार ज्ञान निर्माण
(iii) सामाजिक विकास (Social Development)
समाज के साथ तालमेल
सहयोग, नेतृत्व, समूह व्यवहार
नियमों और मूल्यों की समझ
(iv) भावनात्मक विकास (Emotional Development)
खुशी, डर, क्रोध, प्रेम की अभिव्यक्ति
आत्म-नियंत्रण
आत्म-विश्वास का विकास
(v) नैतिक विकास (Moral Development)
सही–गलत की समझ
सामाजिक नियमों का पालन
कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक अवस्थाएँ
3️⃣ विकास और वृद्धि में अंतर
वृद्धि (Growth)
विकास (Development)
मात्रात्मक परिवर्तन
गुणात्मक परिवर्तन
मापा जा सकता है
सीधे नहीं मापा जा सकता
शारीरिक सीमित
सभी पक्षों से संबंधित
4️⃣ बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक
आनुवंशिकता (Heredity)
पर्यावरण (Environment)
पोषण
शिक्षा और अनुभव
संस्कृति और समाज


 

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